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mahabharat 12.141.16: उन दिनों कोहरा तो था नहीं, फिर बादल कैसे बनते? नदियों में जल का प्रवाह बहुत क्षीण हो गया और बहुत-सी नदियाँ लुप्त हो गईं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 141: ‘ब्राह्मण भयंकर संकटकालमें किस तरह जीवन-निर्वाह करे’ इस विषयमें विश्वामित्र मुनि और चाण्डालका संवाद  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.141.16 
नावश्यायोऽपि तत्राभूत् कुत एवाभ्रजातय:।
नद्य: संक्षिप्ततोयौघा: किंचिदन्तर्गतास्तत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों कोहरा तो था नहीं, फिर बादल कैसे बनते? नदियों में जल का प्रवाह बहुत क्षीण हो गया और बहुत-सी नदियाँ लुप्त हो गईं॥16॥
 
There was no fog in those days, so how could clouds have formed? The flow of water in the rivers became very weak and many rivers disappeared.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)