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श्लोक 12.141.101  |
एतां बुद्धिं समास्थाय जीवितव्यं सदा भवेत्।
जीवन् पुण्यमवाप्नोति पुरुषो भद्रमश्नुते॥ १०१॥ |
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| अनुवाद |
| इस ज्ञान का आश्रय लेकर मनुष्य को सदैव जीवित रहने का प्रयत्न करना चाहिए; क्योंकि जीवित रहने वाले मनुष्य को पुण्य कर्म करने का अवसर मिलता है और वह कल्याण का भागी बनता है॥101॥ |
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| Taking recourse to this wisdom, one must always strive to remain alive; for a man who remains alive gets the opportunity to perform pious deeds and becomes a sharer in welfare.॥ 101॥ |
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