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mahabharat 12.140.7: राजा को सदैव दण्ड देने के लिए तत्पर रहना चाहिए और सदैव अपना पुरुषार्थ प्रदर्शित करना चाहिए। राजा को अपने अंदर कोई दुर्बलता नहीं रहने देनी चाहिए। उसे सदैव शत्रु की दुर्बलताओं पर नजर रखनी चाहिए और यदि उसे शत्रुओं की दुर्बलताओं का पता चल जाए तो उन पर आक्रमण कर देना चाहिए। 7.   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.140.7 
नित्यमुद्यतदण्ड: स्यान्नित्यं विवृतपौरुष:।
अच्छिद्रश्छिद्रदर्शी च परेषां विवरानुग:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजा को सदैव दण्ड देने के लिए तत्पर रहना चाहिए और सदैव अपना पुरुषार्थ प्रदर्शित करना चाहिए। राजा को अपने अंदर कोई दुर्बलता नहीं रहने देनी चाहिए। उसे सदैव शत्रु की दुर्बलताओं पर नजर रखनी चाहिए और यदि उसे शत्रुओं की दुर्बलताओं का पता चल जाए तो उन पर आक्रमण कर देना चाहिए। 7.
 
‘The king should always be ready to punish and should always display his efforts. The king should not allow any weakness to remain in him. He should always keep an eye on the weaknesses of the enemy and if he comes to know about the weaknesses of the enemies, he should attack them. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)