Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.140.66: बुद्धिमान राजा कोमल शत्रु को भी कोमल विधि से नष्ट कर देता है और भयंकर शत्रु को भी कोमल विधि से ही मार डालता है। कोमल विधि से कोई भी कार्य असंभव नहीं है; इसलिए कोमल विधि बहुत तीक्ष्ण होती है॥ 66॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.140.66 
मृदुनैव मृदुं हन्ति मृदुना हन्ति दारुणम्।
नासाध्यं मृदुना किंचित् तस्मात् तीक्ष्णतरो मृदुु:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान राजा कोमल शत्रु को भी कोमल विधि से नष्ट कर देता है और भयंकर शत्रु को भी कोमल विधि से ही मार डालता है। कोमल विधि से कोई भी कार्य असंभव नहीं है; इसलिए कोमल विधि बहुत तीक्ष्ण होती है॥ 66॥
 
‘A wise king destroys a soft enemy with a soft method and also kills a fierce enemy with a soft method. Nothing is impossible with a soft method; hence, a soft method is very sharp.॥ 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)