Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.53: ऐश्वर्य चाहने वाले राजा को चाहिए कि वह अपनी निन्दा-वृत्ति त्यागकर सदैव प्रजा को अपने पक्ष में रखने का प्रयत्न करे, दूसरों पर कृपा करे तथा अपने शत्रुओं का भी बड़े यत्न से दमन करे ॥ 53॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संग्रहानुग्रहे यत्न: सदा कार्योऽनसूयता।
निग्रहश्चापि यत्नेन कर्तव्यो भूतिमिच्छता॥ ५३॥
अनुवाद
ऐश्वर्य चाहने वाले राजा को चाहिए कि वह अपनी निन्दा-वृत्ति त्यागकर सदैव प्रजा को अपने पक्ष में रखने का प्रयत्न करे, दूसरों पर कृपा करे तथा अपने शत्रुओं का भी बड़े यत्न से दमन करे ॥ 53॥
'A king desirous of prosperity should abandon his critical attitude and always strive to keep the people on his side, be gracious to others and also suppress his enemies with great effort. ॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥