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mahabharat 12.140.52: शत्रु चाहे दयनीय बातें भी कर रहा हो, तो भी उसे मारे बिना मत छोड़ो। जिसने तुम्हें हानि पहुँचाई है, उसे पहले मार डालना चाहिए, और उसका दु:ख मत करो।   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.140.52 
अमित्रं नैव मुञ्चेत वदन्तं करुणान्यपि।
दु:खं तत्र न कर्तव्यं हन्यात् पूर्वापकारिणम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
शत्रु चाहे दयनीय बातें भी कर रहा हो, तो भी उसे मारे बिना मत छोड़ो। जिसने तुम्हें हानि पहुँचाई है, उसे पहले मार डालना चाहिए, और उसका दु:ख मत करो।
 
‘Even if the enemy is speaking pitifully, do not let him go without killing him. One who has harmed you first must be killed and do not feel sad about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)