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mahabharat 12.140.51: जन्म से कोई मित्र या शत्रु नहीं होता। मित्र और शत्रु तो शक्ति के बल पर ही पैदा होते हैं।'   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.140.51 
नास्ति जात्या रिपुर्नाम मित्रं वापि न विद्यते।
सामर्थ्ययोगाज्जायन्ते मित्राणि रिपवस्तथा॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
जन्म से कोई मित्र या शत्रु नहीं होता। मित्र और शत्रु तो शक्ति के बल पर ही पैदा होते हैं।'
 
‘No one is a friend or an enemy by birth. Friends and enemies are born only by the power of power.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)