Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.49: शत्रु के आने पर खड़े होकर उसका स्वागत करो, उसे नमस्कार करो और उसे कोई विशेष उपहार दो। पहले इन सब व्यवहारों से उसे वश में करो। इसके बाद जैसे तीखी चोंच वाला पक्षी वृक्ष के प्रत्येक फूल और फल को चोंच मारता है, वैसे ही उसके साधनों और उद्देश्यों पर आक्रमण करो॥ 49॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रु के आने पर खड़े होकर उसका स्वागत करो, उसे नमस्कार करो और उसे कोई विशेष उपहार दो। पहले इन सब व्यवहारों से उसे वश में करो। इसके बाद जैसे तीखी चोंच वाला पक्षी वृक्ष के प्रत्येक फूल और फल को चोंच मारता है, वैसे ही उसके साधनों और उद्देश्यों पर आक्रमण करो॥ 49॥
‘When the enemy arrives, stand up and welcome him, greet him and give him some unique gift. First subdue him with all these behaviours. After this, just like a bird with a sharp beak pecks at every flower and fruit of a tree, in the same way attack his means and objectives.॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥