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mahabharat 12.140.33: ‘जब तक भय तुम्हारे ऊपर न आए, तब तक भयभीत मनुष्य की भाँति उससे बचने का प्रयत्न करना चाहिए; किन्तु जब भय को अपने सामने आता हुआ देखो, तब निर्भय होकर शत्रु पर आक्रमण करना चाहिए ॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.140.33 
भीतवत् संविधातव्यं यावद् भयमनागतम्।
आगतं तु भयं दृष्ट्वा प्रहर्तव्यमभीतवत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘जब तक भय तुम्हारे ऊपर न आए, तब तक भयभीत मनुष्य की भाँति उससे बचने का प्रयत्न करना चाहिए; किन्तु जब भय को अपने सामने आता हुआ देखो, तब निर्भय होकर शत्रु पर आक्रमण करना चाहिए ॥ 33॥
 
‘Until fear has come upon you, you should try to avoid it like a person who is frightened; but when you see fear coming in front of you, you should fearlessly attack the enemy. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)