Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.30: जो राजा अपने शत्रु को अपने सामने झुकते हुए देखकर भी उसे नहीं मारता, वह अपनी मृत्यु को स्वयं आमंत्रित करता है, जैसे खच्चर केवल मरने के लिए ही गर्भ धारण करता है॥30॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दण्डेनोपनतं शत्रुं यो राजा न नियच्छति।
स मृत्युमुपगृह्णाति गर्भमश्वतरी यथा॥ ३०॥
अनुवाद
जो राजा अपने शत्रु को अपने सामने झुकते हुए देखकर भी उसे नहीं मारता, वह अपनी मृत्यु को स्वयं आमंत्रित करता है, जैसे खच्चर केवल मरने के लिए ही गर्भ धारण करता है॥30॥
'The king who does not kill his enemy even after finding him bowing down before him, invites his own death. Just like a mule conceives only to die.॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥