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mahabharat 12.140.13: राजा को चाहिए कि वह बातचीत में भी अत्यंत विनम्र रहे, अपने हृदय को छुरी के समान तीक्ष्ण रखे, पहले हँसकर मधुर वचन बोले और काम-क्रोध का त्याग कर दे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.140.13 
वाङ्मात्रेण विनीत: स्याद् हृदयेन यथा क्षुर:।
श्लक्ष्णपूर्वाभिभाषी च कामक्रोधौ विवर्जयेत्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह बातचीत में भी अत्यंत विनम्र रहे, अपने हृदय को छुरी के समान तीक्ष्ण रखे, पहले हँसकर मधुर वचन बोले और काम-क्रोध का त्याग कर दे॥13॥
 
‘The king should be extremely polite even in conversation, keep his heart sharp like a knife; first speak sweetly with a smile and give up lust and anger.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)