Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.140.1: युधिष्ठिर ने पूछा - भरतनंदन! पितामह! सत्ययुग, त्रेता और द्वापर - ये तीनों युग अब लगभग समाप्त हो रहे हैं, इसीलिए संसार में धर्म का ह्रास होने लगा है। चोर-डाकू धर्म में अधिक बाधा डाल रहे हैं; ऐसे समय में किस प्रकार जीवनयापन करना चाहिए?॥1॥ | mahabharat अध्याय 12.140: भारद्वाज कणिकका सौराष्ट्रदेशके राजाको कूटनीतिका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर उवाच
युगक्षयात् परिक्षीणे धर्मे लोके च भारत।
दस्युभि: पीडॺमाने च कथं स्थेयं पितामह॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - भरतनंदन! पितामह! सत्ययुग, त्रेता और द्वापर - ये तीनों युग अब लगभग समाप्त हो रहे हैं, इसीलिए संसार में धर्म का ह्रास होने लगा है। चोर-डाकू धर्म में अधिक बाधा डाल रहे हैं; ऐसे समय में किस प्रकार जीवनयापन करना चाहिए?॥1॥
Yudhishthira asked-Bharatanandan! Grandfather! Satyayug, Treta and Dwapar-these three yugas are almost coming to an end, that is why Dharma has started declining in the world. Robbers and thieves are creating more obstacles in Dharma; how should one live in such times?॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥