श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीका युधिष्ठिरको राजदण्डधारणपूर्वक पृथ्वीका शासन करनेके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.14.39 
यजस्व विविधैर्यज्ञैर्युध्यस्वारीन् प्रयच्छ च।
धनानि भोगान् वासांसि द्विजातिभ्यो नृपोत्तम॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे राजनश्रेष्ठ! नाना प्रकार के यज्ञ करो और शत्रुओं से युद्ध करो। ब्राह्मणों को धन, भौतिक वस्तुएँ और वस्त्र दान करो।
 
O best of kings! Perform various types of sacrifices and fight against your enemies. Donate wealth, material things and clothes to the Brahmins.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि द्रौपदीवाक्ये चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें द्रौपदीवाक्यविषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)