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श्लोक  12.14.36-37h 
एतेषां यतमानानां न मेऽद्य वचनं मृषा॥ ३६॥
त्वं तु सर्वां महीं त्यक्त्वा कुरुषे स्वयमापदम्।
 
 
अनुवाद
ये सब लोग तुम्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं, फिर भी तुम ध्यान नहीं दे रहे हो। इस समय मैं जो कुछ कह रहा हूँ, वह झूठ नहीं है। सारी दुनिया का राज्य छोड़कर तुम अपने लिए मुसीबत खड़ी कर रहे हो। 36 1/2।
 
All these people are trying to convince you, but still you are not paying attention. Whatever I am saying at this time is not false. By leaving the kingdom of the whole world, you are creating trouble for yourself. 36 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)