श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीका युधिष्ठिरको राजदण्डधारणपूर्वक पृथ्वीका शासन करनेके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.14.26 
एतान्यप्रतिमेयानि कृत्वा कर्माणि भारत।
न प्रीयसे महाराज पूज्यमानो द्विजातिभि:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे भरत नन्द! महाराज! ऐसे अतुलनीय कार्य करके और द्विज जातियों द्वारा सम्मानित होकर भी क्या आप प्रसन्न नहीं हैं?॥ 26॥
 
O Bharata Nanda! Maharaja! Even after performing such matchless feats and being honoured by the Dwija castes, are you not happy?॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)