श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 14: द्रौपदीका युधिष्ठिरको राजदण्डधारणपूर्वक पृथ्वीका शासन करनेके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.14.21 
जम्बूद्वीपो महाराज नानाजनपदैर्युत:।
त्वया पुरुषशार्दूल दण्डेन मृदित: प्रभो॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे राजन! हे नरसिंह! आपने अनेक जनपदों से युक्त इस जम्बूद्वीप को अपने दण्ड से रौंद डाला है।
 
O Lord! O King! O lion of men! You have trampled this Jambudweep with your staff, which consists of several janapadas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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