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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद
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श्लोक 93
श्लोक
12.139.93
कुभार्यां च कुपुत्रं च कुराजानं कुसौहृदम्।
कुसम्बन्धं कुदेशं च दूरत: परिवर्जयेत्॥ ९३॥
अनुवाद
दुष्ट स्त्री, दुष्ट पुत्र, कुटिल राजा, दुष्ट मित्र, बुरे सम्बन्धी और दुष्ट देश से दूर ही रहना चाहिए ॥ 93॥
A wicked wife, a wicked son, a crooked king, a wicked friend, a bad relation and a wicked country should be avoided from a distance. ॥ 93॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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