श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  12.139.57 
प्रलाप: सुमहान् कस्मात् क्रियते शोकमूर्च्छितै:।
यदि काल: प्रमाणं ते कस्माद् धर्मोऽस्ति कर्तृषु॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
यदि आप काल को ही एकमात्र प्रमाण मानते हैं, तो फिर शोक से अचेत हुए मनुष्य इतना रोते-चिल्लाते क्यों हैं? फिर कर्म करने वालों के लिए विधि-निषेध रूपी धर्मपालन का विधान क्यों बनाया गया है?॥57॥
 
If you consider time to be the only proof, then why do people who are unconscious due to grief cry and wail so much? Then why has the rule of following the Dharma in the form of rules and prohibitions been laid down for those who perform actions?॥ 57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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