श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.139.54 
पूजन्युवाच
यदि काल: प्रमाणं ते न वैरं कस्यचिद् भवेत्।
कस्मात् त्वपचितिं यान्ति बान्धवा बान्धवैर्हतै:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
पूजनी बोली - राजन ! यदि आप काल को ही सब कर्मों का कारण मानते हैं, तो किसी को किसी से वैर नहीं करना चाहिए; फिर भाई-बन्धु आदि के मारे जाने पर स्वजन बदला क्यों लेते हैं ?॥ 54॥
 
Poojni said - King! If you consider time to be the cause of all actions, then nobody should have enmity with anybody; then why do the relatives take revenge when their brothers and relatives are killed?॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)