पूजन्युवाच
यदि काल: प्रमाणं ते न वैरं कस्यचिद् भवेत्।
कस्मात् त्वपचितिं यान्ति बान्धवा बान्धवैर्हतै:॥ ५४॥
अनुवाद
पूजनी बोली - राजन ! यदि आप काल को ही सब कर्मों का कारण मानते हैं, तो किसी को किसी से वैर नहीं करना चाहिए; फिर भाई-बन्धु आदि के मारे जाने पर स्वजन बदला क्यों लेते हैं ?॥ 54॥
Poojni said - King! If you consider time to be the cause of all actions, then nobody should have enmity with anybody; then why do the relatives take revenge when their brothers and relatives are killed?॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥