श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 139: शत्रुसे सदा सावधान रहनेके विषयमें राजा ब्रह्मदत्त और पूजनी चिड़ियाका संवाद  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  12.139.100 
बलिषड्भागमुद्‍धृत्य बलिं समुपयोजयेत्।
न रक्षति प्रजा: सम्यग् य: स पार्थिवतस्कर:॥ १००॥
 
 
अनुवाद
जो प्रजा की आय का छठा भाग कर के रूप में लेकर उसका उपभोग करता है और अपनी प्रजा का उचित पालन नहीं करता, वह राजाओं में चोर है ॥100॥
 
He who takes one-sixth of the income of the people as tax and consumes it and does not take care of his people properly is a thief among the kings. ॥100॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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