Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.186: महापुरुष! आपने नैतिकता का सार उसके वास्तविक रूप में समझाया है। मैं आपके विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ। प्रिय मित्र! लेकिन मुझे गलत मत समझिए। मेरे विचार आपके विचारों के विपरीत नहीं हैं। 186। | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उक्तवानर्थतत्त्वेन मया सम्भिन्नदर्शन:।
न तु मामन्यथा साधो त्वं ग्रहीतुमिहार्हसि॥ १८६॥
अनुवाद
महापुरुष! आपने नैतिकता का सार उसके वास्तविक रूप में समझाया है। मैं आपके विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ। प्रिय मित्र! लेकिन मुझे गलत मत समझिए। मेरे विचार आपके विचारों के विपरीत नहीं हैं। 186।
Great man! You have explained the essence of ethics in its true form. I completely agree with your thoughts. Dear friend! But do not misunderstand me. My thoughts are not contrary to yours. 186.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥