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mahabharat 12.138.131: ‘मैं अपने बन्धु-बान्धवों सहित सदैव तुम्हारा आदर करूँगा। इस संसार में ऐसा कौन है जो अपने जीवनदाता की पूजा न करेगा?॥131॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.138.131 
अहं च पूजयिष्ये त्वां समित्रगणबान्धवम्।
जीवितस्य प्रदातारं कृतज्ञ: को न पूजयेत्॥ १३१॥
 
 
अनुवाद
‘मैं अपने बन्धु-बान्धवों सहित सदैव तुम्हारा आदर करूँगा। इस संसार में ऐसा कौन है जो अपने जीवनदाता की पूजा न करेगा?॥131॥
 
‘I, along with my friends and relatives, will always respect you. Who is there in this world who will not worship the one who gives life to him?॥ 131॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)