Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.108: दोनों प्रकार के मित्रों की रक्षा करनी चाहिए - एक तो जिसे भयभीत व्यक्ति ने अपना मित्र बना लिया है और दूसरा जो स्वयं भयभीत होकर उसका मित्र बन गया है। और जैसे बाजीगर साँप के मुँह से हाथ हटाकर उसके साथ खेलता है, वैसे ही उन्हें अपनी रक्षा करते हुए एक-दूसरे के कार्य करने चाहिए॥108॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दोनों प्रकार के मित्रों की रक्षा करनी चाहिए - एक तो जिसे भयभीत व्यक्ति ने अपना मित्र बना लिया है और दूसरा जो स्वयं भयभीत होकर उसका मित्र बन गया है। और जैसे बाजीगर साँप के मुँह से हाथ हटाकर उसके साथ खेलता है, वैसे ही उन्हें अपनी रक्षा करते हुए एक-दूसरे के कार्य करने चाहिए॥108॥
'Both types of friends, one who has been made a friend by a frightened person and one who himself has become his friend out of fear, should be protected. And just as a juggler plays with a snake by keeping his hands away from its mouth, similarly, they should perform each other's tasks while protecting themselves.॥ 108॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥