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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त
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श्लोक 9
श्लोक
12.137.9
दीर्घसूत्रस्तु यस्तत्र सोऽब्रवीत् सम्यगुच्यते।
न तु कार्या त्वरा तावदिति मे निश्चिता मति:॥ ९॥
अनुवाद
इस पर वहाँ उपस्थित दीर्घजीव पुरुष ने कहा - 'मित्र! तुम ठीक कहते हो; परन्तु मेरा दृढ़ मत है कि अब हमें शीघ्रता नहीं करनी चाहिए।'॥9॥
On this the long-souled person present there said, 'Friend! You are right; but I firmly believe that we should not hurry now.'॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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