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mahabharat 12.137.8: जो मनुष्य अपनी उत्तम नीति से आने वाले संकट को आने से पहले ही टाल देता है, उसके प्राण जाने में कभी संदेह नहीं होता। यदि आप सबको मेरी बात ठीक लगे, तो चलो, हम दूसरे जलाशय पर चलें।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.137.8 
अनागतमनर्थं हि सुनयैर्य: प्रबाधयेत्।
स न संशयमाप्नोति रोचतां भो व्रजामहे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी उत्तम नीति से आने वाले संकट को आने से पहले ही टाल देता है, उसके प्राण जाने में कभी संदेह नहीं होता। यदि आप सबको मेरी बात ठीक लगे, तो चलो, हम दूसरे जलाशय पर चलें।॥8॥
 
'He who by his good policy averts the coming danger before it arrives, is never in doubt of losing his life. If you all find my words correct, then let us go to the other water body.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)