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mahabharat 12.137.6: तालाब में जल का स्तर घटता देखकर तथा संकट की संभावना को भांपकर, भविष्य के विषय में विचार करते हुए, मछली ने अपने दोनों मित्रों से कहा -॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.137.6 
प्रक्षीयमाणं तं दृष्ट्वा जलस्थायं भयागमे।
अब्रवीद् दीर्घदर्शी तु तावुभौ सुहृदौ तदा॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तालाब में जल का स्तर घटता देखकर तथा संकट की संभावना को भांपकर, भविष्य के विषय में विचार करते हुए, मछली ने अपने दोनों मित्रों से कहा -॥6॥
 
Seeing the water level in the pond decreasing and sensing the possibility of danger approaching, the fish, who was thinking about future, said to his two friends -॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)