काष्ठा: कला मुहूर्ताश्च दिवारात्रिस्तथा लवा:।
मासा: पक्षा: षड् ऋतव: कल्प: संवत्सरास्तथा॥ २१॥
पृथिवी देश इत्युक्त: काल: स च न दृश्यते।
अभिप्रेतार्थसिद्धॺर्थं ध्यायते यच्च तत्तथा॥ २२॥
अनुवाद
काष्ठा, काल, मुहूर्त, दिन, रात्रि, लव, मास, पक्ष, छह ऋतुएँ, संवत्सर और कल्प - ये 'काल' कहलाते हैं और पृथ्वी 'देश' कहलाती है। इनमें देश तो देखा जा सकता है, पर काल नहीं देखा जा सकता। जो देश और काल अभीष्ट कामना की पूर्ति के लिए उपयोगी माने जाएँ, उन्हें यथार्थ रूप से ग्रहण करना चाहिए। ॥21-22॥
Kashtha, Kala, Muhurta, day, night, Lava, month, fortnight, six seasons, Samvatsar and Kalpa - these are called 'time' and the earth is called 'country'. Of these, the country can be seen, but time cannot be seen. The country and time which are considered useful for the fulfillment of the desired desire should be accepted correctly. ॥21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥