Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.137.18: इसी प्रकार जो मनुष्य आसक्ति के कारण अपने पर आए हुए समय को नहीं समझता, वह उस दीर्घजीवी मछली के समान शीघ्र ही नष्ट हो जाता है ॥18॥ | mahabharat अध्याय 12.137: आने वाले संकटसे सावधान रहनेके लिये दूरदर्शी, तत्कालज्ञ और दीर्घसूत्री—इन तीन मत्स्योंका दृष्टान्त । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं प्राप्ततमं कालं यो मोहान्नावबुद्धॺते।
स विनश्यति वै क्षिप्रं दीर्घसूत्रो यथा झष:॥ १८॥
अनुवाद
इसी प्रकार जो मनुष्य आसक्ति के कारण अपने पर आए हुए समय को नहीं समझता, वह उस दीर्घजीवी मछली के समान शीघ्र ही नष्ट हो जाता है ॥18॥
Similarly, a man who, due to attachment, does not understand the time that has come upon him, gets destroyed very soon like that long-spirited fish. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥