Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.136.11: जैसे पृथ्वी की धूल को अचानक उठाकर पत्थर पर पीसने से वह और भी सूक्ष्म हो जाती है, वैसे ही विचार करने से धर्म का स्वरूप उत्तरोत्तर सूक्ष्म होता जाता है ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.136: राजा किसका धन ले और किसका न ले तथा किसके साथ कैसा बर्ताव करे—इसका विचार । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे पृथ्वी की धूल को अचानक उठाकर पत्थर पर पीसने से वह और भी सूक्ष्म हो जाती है, वैसे ही विचार करने से धर्म का स्वरूप उत्तरोत्तर सूक्ष्म होता जाता है ॥11॥
Just as if the dust from the earth is suddenly taken and ground on a stone, it becomes even finer, so on contemplating, the nature of Dharma becomes increasingly subtle. ॥11॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि षट्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें एक सौ छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥