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श्लोक  12.135.6 
अप्यनेकशतां सेनामेक एव जिगाय स:।
स वृद्धावन्धबधिरौ महारण्येऽभ्यपूजयत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वह अकेले ही सैकड़ों लोगों की सेना को परास्त कर देता था और उस महान वन में रहकर अपने अंधे और बहरे माता-पिता की सेवा करता था।
 
He used to single-handedly defeat the army of hundreds of people and used to stay in that great forest and serve his blind and deaf parents. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)