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mahabharat 12.135.4: कायव्य प्रतिदिन सुबह-शाम वन में जाकर हिरणों के झुंड को उत्तेजित करते थे। वे विभिन्न प्रकार के हिरणों के स्वभाव से परिचित थे और उन्हें नियंत्रित करने की कला जानते थे। वे निषादों में सबसे कुशल थे।   |   mahabharat अध्याय 12.135: मर्यादाका पालन करने-करानेवाले कायव्यनामक दस्युकी सद्‍गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.135.4 
अरण्ये सायं पूर्वाह्णे मृगयूथप्रकोपिता।
विधिज्ञो मृगजातीनां नैषादानां च कोविद:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कायव्य प्रतिदिन सुबह-शाम वन में जाकर हिरणों के झुंड को उत्तेजित करते थे। वे विभिन्न प्रकार के हिरणों के स्वभाव से परिचित थे और उन्हें नियंत्रित करने की कला जानते थे। वे निषादों में सबसे कुशल थे।
 
Kayavya used to go to the forest every morning and evening and excite the herds of deer. He was familiar with the nature of different species of deer and knew the art of controlling them. He was the most skilled among the Nishads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)