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श्लोक  12.135.24 
कायव्य: कर्मणा तेन महतीं सिद्धिमाप्तवान्।
साधूनामाचरन् क्षेमं दस्यून् पापान्निवर्तयन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कायव्य ने उस पुण्य कर्म को करके महान् सिद्धि प्राप्त की; क्योंकि उसने साधुओं का उपकार करते हुए लुटेरों को पाप से बचाया।
 
Kayavya attained great success by doing that pious deed; because he saved the robbers from sin while doing good to the saints. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)