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mahabharat 12.135.21: जो लोग राष्ट्र को हानि पहुँचाकर अपनी उन्नति करने का प्रयत्न करते हैं, वे शवों के बीच पड़े कीड़ों की भाँति तुरन्त नष्ट हो जाते हैं ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.135: मर्यादाका पालन करने-करानेवाले कायव्यनामक दस्युकी सद्‍गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.135.21 
ये च राष्ट्रोपरोधेन वृद्धिं कुर्वन्ति केचन।
तदैव तेऽनुमार्यन्ते कुणपे कृमयो यथा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो लोग राष्ट्र को हानि पहुँचाकर अपनी उन्नति करने का प्रयत्न करते हैं, वे शवों के बीच पड़े कीड़ों की भाँति तुरन्त नष्ट हो जाते हैं ॥21॥
 
Those who try to advance themselves by harming the nation, perish instantly like insects lying among dead bodies. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)