Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.135.2-3: कायव्य नाम से प्रसिद्ध निषाद पुत्र ने डाकू होते हुए भी सिद्धि प्राप्त कर ली थी। वह आक्रमण करने में कुशल, वीर, बुद्धिमान, विद्वान, क्रूरता रहित, आश्रमवासियों के धर्म का रक्षक, ब्राह्मणभक्त और गुरुभक्त था। वह क्षत्रिय पिता से तथा निषाद जाति की स्त्री के गर्भ से उत्पन्न हुआ था; अतः वह सदैव क्षत्रिय धर्म का पालन करता था। 2-3॥ | mahabharat अध्याय 12.135: मर्यादाका पालन करने-करानेवाले कायव्यनामक दस्युकी सद्गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कायव्य नाम से प्रसिद्ध निषाद पुत्र ने डाकू होते हुए भी सिद्धि प्राप्त कर ली थी। वह आक्रमण करने में कुशल, वीर, बुद्धिमान, विद्वान, क्रूरता रहित, आश्रमवासियों के धर्म का रक्षक, ब्राह्मणभक्त और गुरुभक्त था। वह क्षत्रिय पिता से तथा निषाद जाति की स्त्री के गर्भ से उत्पन्न हुआ था; अतः वह सदैव क्षत्रिय धर्म का पालन करता था। 2-3॥
A famous son of Nishad by the name of Kayavya had attained Siddhi despite being a bandit. He was skilled in attack, brave, intelligent, scholar, without cruelty, protector of the religion of the ashram residents, devotee of Brahmin and worshiper of Guru. He was born from a Kshatriya father and from the womb of a Nishad caste woman; Therefore, he always followed Kshatriya Dharma. 2-3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥