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mahabharat 12.135.17: देखो, जिसके पतन की बात ब्राह्मण क्रोधपूर्वक सोचते हैं, उसका तीनों लोकों में कोई रक्षक नहीं है ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.135: मर्यादाका पालन करने-करानेवाले कायव्यनामक दस्युकी सद्‍गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.135.17 
यस्य ह्येते सम्प्ररुष्टा मन्त्रयन्ति पराभवम्।
न तस्य त्रिषु लोकेषु त्राता भवति कश्चन॥ १७॥
 
 
अनुवाद
देखो, जिसके पतन की बात ब्राह्मण क्रोधपूर्वक सोचते हैं, उसका तीनों लोकों में कोई रक्षक नहीं है ॥17॥
 
See, the one whose downfall the Brahmins think of in anger has no protector in the three worlds. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)