| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 132: ब्राह्मणों और श्रेष्ठ राजाओंके धर्मका वर्णन तथा धर्मकी गतिको सूक्ष्म बताना » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 12.132.3  | भीष्म उवाच
विज्ञानबलमास्थाय जीवितव्यं तथागते।
सर्वं साध्वर्थमेवेदमसाध्वर्थं न किंचन॥ ३॥ | | | | | | अनुवाद | | भीष्म ने कहा- युधिष्ठिर! ऐसी स्थिति में ब्राह्मण को अपने ज्ञान और बल का ही आश्रय लेकर जीवन निर्वाह करना चाहिए। इस संसार में जो कुछ भी धन आदि दिखाई देता है, वह सब सज्जनों के लिए ही है, दुष्टों के लिए इसमें कुछ भी नहीं है। | | | | Bhishma said- Yudhishthira! In such a situation, a Brahmin should take recourse to his knowledge and strength to survive. Whatever wealth etc. is visible in this world, all of it is meant for the noble men only, there is nothing for the wicked. | | ✨ ai-generated | | |
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