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श्लोक 12.132.22  |
एवं सद्भिर्विनीतेन पथा गन्तव्यमित्युत।
राजर्षीणां वृत्तमेतदवगच्छ युधिष्ठिर॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर! तुम्हें भी इन महापुरुषों के बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए। इसे राजाओं का सदाचार समझो। |
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| Yudhishthira! You should also follow the path followed by these great men. Consider this to be the good conduct of kings. |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि राजर्षिवृत्तं नाम द्वात्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें राजर्षियोंका चरित्र नामक एक सौ बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३२॥
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