श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 132: ब्राह्मणों और श्रेष्ठ राजाओंके धर्मका वर्णन तथा धर्मकी गतिको सूक्ष्म बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.132.14 
यथा सुमधुरौ दम्यौ सुदान्तौ साधुवाहिनौ।
धुरमुद्यम्य वहतास्तथा वर्तेत वै नृप:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जैसे दो जवान बैल, जो देखने में सुन्दर, प्रशिक्षित और भार उठाने में समर्थ होते हैं, भार को कंधे पर उठाकर उसे सुन्दरता से ढोते हैं, वैसे ही राजा को भी अपने राज्य का भार अच्छी तरह संभालना चाहिए ॥14॥
 
Just as two young oxen, handsome in appearance, well-trained and capable of carrying a good load, shoulder a load and carry it gracefully, so too should the king handle the burden of his kingdom well. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)