Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.130.50: धन संचय करने से ही धर्म, काम, इहलोक और परलोक की प्राप्ति होती है। उस धन को केवल धर्म से ही प्राप्त करने की इच्छा करनी चाहिए, अधर्म से कभी नहीं।॥50॥ | mahabharat अध्याय 12.130: आपत्तिके समय राजाका धर्म । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धन संचय करने से ही धर्म, काम, इहलोक और परलोक की प्राप्ति होती है। उस धन को केवल धर्म से ही प्राप्त करने की इच्छा करनी चाहिए, अधर्म से कभी नहीं।॥50॥
Only by accumulating wealth can one achieve Dharma, Kama, this world and the other world. One should desire to obtain that wealth only by Dharma, never by Adharma.॥ 50॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें एक सौ तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥