श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 13: सहदेवका युधिष्ठिरको ममता और आसक्तिसे रहित होकर राज्य करनेकी सलाह देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.13.5 
ब्रह्ममृत्यू ततो राजन्नात्मन्येव समाश्रितौ।
अदृश्यमानौ भूतानि योधयेतामसंशयम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इससे यह स्पष्ट होता है कि मृत्यु और अमरता दोनों ही हमारे भीतर स्थित हैं। वे अदृश्य रहकर जीवों को आपस में लड़ाते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है॥5॥
 
O King! This indicates that both death and immortality are situated within us. They remain invisible and make the living beings fight with each other, there is no doubt about this. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)