श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 126: राजा सुमित्रका मृगकी खोज करते हुए तपस्वी मुनियोंके आश्रमपर पहुँचना और उनसे आशाके विषयमें प्रश्न करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.126.9 
बलेन महता गुप्त: सामात्य: सावरोधन:।
मृगस्तु विद्धो बाणेन मया सरति शल्यवान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मेरे साथ बहुत बड़ी सेना थी। उसी से सुरक्षित होकर मैं अपने मन्त्रियों और अंतःपुर के साथ आया था, किन्तु मेरे बाणों से घायल हुआ एक मृग बाण लेकर भाग गया॥9॥
 
‘I had a very large army with me. Protected by it, I came with my ministers and my harem, but a deer wounded by my arrows fled away with the arrow.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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