श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 126: राजा सुमित्रका मृगकी खोज करते हुए तपस्वी मुनियोंके आश्रमपर पहुँचना और उनसे आशाके विषयमें प्रश्न करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.126.5 
केन भद्र सुखार्थेन सम्प्राप्तोऽसि तपोवनम्।
पदातिर्बद्धनिस्त्रिंशो धन्वी बाणी नरेश्वर॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे कल्याणरूपी नरेश्वर! आप किस सुख के लिए तलवार, धनुष और बाण लेकर पैदल इस तपोवन में आये हैं?
 
‘Nareshwar in the form of welfare! For what pleasure have you come to this Tapovan on foot with a sword, a bow and arrows? 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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