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श्लोक 12.126.5  |
केन भद्र सुखार्थेन सम्प्राप्तोऽसि तपोवनम्।
पदातिर्बद्धनिस्त्रिंशो धन्वी बाणी नरेश्वर॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| हे कल्याणरूपी नरेश्वर! आप किस सुख के लिए तलवार, धनुष और बाण लेकर पैदल इस तपोवन में आये हैं? |
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| ‘Nareshwar in the form of welfare! For what pleasure have you come to this Tapovan on foot with a sword, a bow and arrows? 5॥ |
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