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mahabharat 12.126.2: वे थके हुए और भूखे थे। राजा सुमित्र को उस अवस्था में धनुष धारण किए हुए देखकर बहुत से ऋषिगण उनके पास आए और सबने मिलकर उनका आदरपूर्वक स्वागत किया॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.126: राजा सुमित्रका मृगकी खोज करते हुए तपस्वी मुनियोंके आश्रमपर पहुँचना और उनसे आशाके विषयमें प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 126: राजा सुमित्रका मृगकी खोज करते हुए तपस्वी मुनियोंके आश्रमपर पहुँचना और उनसे आशाके विषयमें प्रश्न करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.126.2 
तं कार्मुकधरं दृष्ट्वा श्रमार्तं क्षुधितं तदा।
समेत्य ऋषयस्तस्मिन् पूजां चक्रुर्यथाविधि॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे थके हुए और भूखे थे। राजा सुमित्र को उस अवस्था में धनुष धारण किए हुए देखकर बहुत से ऋषिगण उनके पास आए और सबने मिलकर उनका आदरपूर्वक स्वागत किया॥ 2॥
 
They were tired and hungry. Seeing King Sumitra holding a bow in that condition, many sages came to him and together they welcomed him with due respect.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)