श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 126: राजा सुमित्रका मृगकी खोज करते हुए तपस्वी मुनियोंके आश्रमपर पहुँचना और उनसे आशाके विषयमें प्रश्न करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.126.17 
यदि गुह्यं न वो नित्यं तदा प्रब्रूत मा चिरम्।
न गुह्यं श्रोतुमिच्छामि युष्मद्‍भ्यो द्विजसत्तमा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यदि यह बात तुम्हारे लिए सर्वदा गुप्त न हो, तो कृपया मुझे शीघ्र ही बता दो। हे ब्राह्मणो! मैं तुमसे कोई गुप्त बात नहीं सुनना चाहता।॥17॥
 
'If this is not a secret for you all the time, then please tell me about it soon. O Brahmins! I do not want to hear from you anything that is a secret.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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