Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.125.4: प्रायः प्रत्येक मनुष्य के हृदय में कोई बड़ी आशा जगती है। जब वह टूट जाती है, तो बड़ा दुःख होता है। कुछ लोग मर भी जाते हैं, इसमें सन्देह नहीं। ॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रायः प्रत्येक मनुष्य के हृदय में कोई बड़ी आशा जगती है। जब वह टूट जाती है, तो बड़ा दुःख होता है। कुछ लोग मर भी जाते हैं, इसमें सन्देह नहीं। ॥4॥
Usually, some great hope arises in the heart of every human being. When it is shattered, there is great sorrow. Some even die, there is no doubt about it. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥