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mahabharat 12.125.18: यह देखकर हिरणों का सरदार राजा के बाणों का मार्ग छोड़कर दो मील दूर चला गया और वहाँ खड़ा होकर हँसने लगा।   |   mahabharat अध्याय 12.125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.125.18 
ततो गव्यूतिमात्रेण मृगयूथपयूथप:।
तस्य बाणपथं मुक्त्वा तस्थिवान् प्रहसन्निव॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर हिरणों का सरदार राजा के बाणों का मार्ग छोड़कर दो मील दूर चला गया और वहाँ खड़ा होकर हँसने लगा।
 
Seeing this, the leader of the deer left the path of the king's arrows and went two miles away and stood there laughing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)