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mahabharat 12.125.17: तब राजा शत्रुसूदन ने एक अत्यन्त तीक्ष्ण बाण हाथ में लिया, जो प्राणों को भेदने में समर्थ था। उन्होंने उस उत्तम बाण को धनुष पर चढ़ाया।   |   mahabharat अध्याय 12.125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.125.17 
तस्य मर्मच्छिदं घोरं तीक्ष्णं चामित्रकर्शन:।
समादाय शरं श्रेष्ठं कार्मुके तु तथासृजत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब राजा शत्रुसूदन ने एक अत्यन्त तीक्ष्ण बाण हाथ में लिया, जो प्राणों को भेदने में समर्थ था। उन्होंने उस उत्तम बाण को धनुष पर चढ़ाया।
 
Then King Shatrusudan took a very sharp arrow in his hand, which was capable of piercing the vital spots. He placed that excellent arrow on the bow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)