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mahabharat 12.125.16: राजेंद्र! वह हिरणों के झुंड का नेता था। उसकी गति बहुत तेज़ थी। वह बार-बार तेज़ी से उछलता और दूर के इलाकों को पार करके फिर पास आ जाता। 16.   |   mahabharat अध्याय 12.125: युधिष्ठिरका आशाविषयक प्रश्न—उत्तरमें राजा सुमित्र और ऋषभ नामक ऋषिके इतिहासका आरम्भ, उसमें राजा सुमित्रका एक मृगके पीछे दौड़ना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.125.16 
पुनश्च जवमास्थाय जवनो मृगयूथप:।
अतीत्यातीत्य राजेन्द्र पुनरभ्येति चान्तिकम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! वह हिरणों के झुंड का नेता था। उसकी गति बहुत तेज़ थी। वह बार-बार तेज़ी से उछलता और दूर के इलाकों को पार करके फिर पास आ जाता। 16.
 
Rajendra! He was the leader of the herd of deer. His speed was very fast. He would repeatedly jump with great speed and after crossing far off lands would come near again. 16.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)