| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन » श्लोक 71 |
|
| | | | श्लोक 12.124.71  | भीष्म उवाच
एतत् कथितवान् पुत्रे धृतराष्ट्रो नराधिप:।
एतत् कुरुष्व कौन्तेय तत: प्राप्स्यसि तत् फलम्॥ ७१॥ | | | | | | अनुवाद | | भीष्मजी कहते हैं- हे कुन्तीपुत्र! राजा धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र को यही उपदेश दिया था। तुम भी इसका पालन करो, तुम्हें भी वही फल मिलेगा। | | | | Bhishmaji says- O son of Kunti! King Dhritarashtra had given this advice to his son. You should also follow it, you will also get the same result. | | | इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि शीलवर्णनं नाम चतुर्विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें शीलवर्णनविषयक एक सौ चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२४॥
| | | | ✨ ai-generated | | |
|
|