श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  12.124.70 
एतद् विदित्वा तत्त्वेन शीलवान् भव पुत्रक।
यदीच्छसि श्रियं तात सुविशिष्टां युधिष्ठिरात् ॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
बेटा! यदि तुम युधिष्ठिर से भी उत्तम धन प्राप्त करना चाहते हो, तो इस उपदेश को ठीक से समझकर सदाचारी बनो ॥70॥
 
Son! If you want to get better wealth than Yudhishthira, then understand this advice correctly and become virtuous. 70॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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